Dussehra कब है? कैसे मनाया जाता है? और Dussehra से जुडी पौराणिक कथा क्या है?

Dussehra 2025: हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है, जिसे विजयदशमी (Vijaydashmi) भी कहा जाता है। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है जिसे पूरे भारतवर्ष में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

यह त्यौहार शरद नवरात्री के अंत में आता है और इस दिन रावण दहन किया जाता है साथ ही इस दिन पूजा भी की जाती है।

आइये हम आपको बताते है कि इस वर्ष 2025 में दशहरा कब है, हिन्दू धर्म में इसका क्या धार्मिक महत्व है, दशहरा कैसे मनाया जाता है और दशहरा से जुडी पौराणिक कथा क्या है?

Dussehra 2025 कब है?

दशहरा हर साल नवरात्री के अंत में मनाया जाने वाला पर्व है व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है।

इस साल 2025 में हिन्दू पंचांग के अनुसार दशमी तिथि की शुरुआत 1 अक्टूबर को दिन में 2 बजकर 19 मिनट पर होगी तथा अगले दिन यानी कि 2 अक्टूबर को दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।

Dussehra का त्यौहार उदय तिथि के अनुसार मनाया जाता है इसलिए दशहरा 2 अक्टूबर 2025 के दिन मनाया जायेगा।

Dussehra क्यों मनाया जाता है? क्या है इसका धार्मिक महत्व, और पौराणिक कथा

दशहरा असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है व धार्मिक रूप से दशहरे से जुडी दो कथाएँ है।

एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान् राम ने दशानन (दस सिर वाले) रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कर अधर्म पर धर्म की जीत प्राप्त की थी। रावण विद्वान व शक्तिशाली होने के साथ अहंकारी भी था यही अहंकार उसकी मृत्यु का कारण बना।

दूसरी मान्यता के अनुसार आश्विन मास में नवरात्र के समय माँ दुर्गा ने महिसासुर राक्षस के साथ लगातार नौ दिनों तक युद्ध किया व दसवे यानि की दशमी के दिन महिसासुर राक्षस का वध किया इसलिए इस दिन को भक्ति व शक्ति का पर्व भी माना जाता है।

दशहरा शस्त्र पूजन का दिन भी माना जाता है, प्राचीन काल से ही योद्धा इस दिन अपने अस्त्र शस्त्रो की पूजा करते आये है। इस दिन लोग मशीनो और औजारों की पूजा भी करते है।

मान्यता है कि दशहरे के दिन वाहन खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना,आदि कार्य करना शुभ माना जाता है। यही कारण है कि हर साल दशहरे के दिन अधिकांश लोग वाहन खरीदते है।

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कैसे मनाया जाता है पूरे भारतवर्ष में Dussehra Festival?

भारतवर्ष में दशहरा अलग अलग तरीको से मनाया जाता है, इसीलिए भारत को विविधताओं से भरा हुआ देश भी कहा जाता है। लेकिन सबका मूल भाव एक ही होता है। 

उत्तर भारत (North india) में दशहरा के समय रामलीला का मंचन किया जाता है व अंतिम दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले का दहन किया जाता है। इस दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

पूर्वी भारत (East India) में दशहरा को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में माँ दुर्गा की पूजा की जाती है यह पूजा नवरात्रो के नौ दिनों तक चलती है और दशमी के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है।

दक्षिण भारत (South india) में इस दिन हाथियों की शोभायात्रा निकाली जाती है साथ ही भव्य जुलुस निकाला जाता है। कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में दशहरा के दिन माँ चामुंडेश्वरी की पूजा की जाती है।

पश्चिम भारत (West india) में दशहरे में नौ दिनों तक डांडिया और गरबा के साथ इसे मनाया जाता है। गुजरात और महाराष्ट्र में दशहरे के दिन नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।

Dussehra 2025 पूजा विधि

दशहरा में पूजा का अपना महत्व है इस दिन सभी लोग अपने-अपने घरो में पूजा अर्चना करते है। आप भी लिखे गए तरीके से पूजा कर सकते है:

सबसे पहले घर की अच्छी तरह साफ़ सफाई कर ले उसके बाद स्नान करके नए साफ सुथरे कपडे पहने। उसके बाद घर और मंदिर की सजावट करे साथ ही मंदिर में भगवान् राम और माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करे।

मंदिर में कलश स्थापित करे व उसमे गंगाजल, सुपारी, सिक्का व शमी के पत्ते रखें और ऊपर नारियल रख दें, साथ ही फूल, दीपक, फल, मिठाई, धूप मंदिर में रख ले।

शमी के पत्ते को घर में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है इसलिए दशहरे के दिन शमी वृक्ष की पूजा का भी महत्व है।

इसके बाद रामचरितमानस और दुर्गा सप्तशती का पाठ करे व भगवान् राम और माँ दुर्गा की पूजा करे। इसके बाद घी, कपूर और हवन सामग्री से हवन करें और अपने परिवार के साथ मिलकर आरती करें और अंत में प्रसाद का वितरण करें।

शाम के समय शुभ मुहूर्त में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करें। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।

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