Hariyali Teej 2025: सावन का महीना प्रकृति को समर्पित होता है और यह वर्षा ऋतु के आगमन का महीना भी माना जाता है। वर्षा ऋतु के आने से प्रकृति हरी भरी हो जाती है इसलिए इस मौसम में हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाता है।
हरियाली तीज भारतीय सस्कृति की खूबसूरती और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यह पर्व महिलाओ द्वारा अपने पति की सुख समृद्धि की कामना एवं अपनी परंपराओं को सहेजने का अवसर प्रदान करती है।
हरियाली तीज के दिन भगवान् शिव व माता पार्वती को भोग लगाया जाता है। हरियाली तीज हमारी सस्कृति, सामाजिक एवं पारिवारिक जुड़ाव को बढ़ावा देती है।
हालांकि इस बार 26 या 27 जुलाई 2025 में से किस दिन हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाएगा, इससे संबंधित हमने एक लेख तैयार किया है जिसमें आपको हरियाली तीज के संपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
2025 में सावन की तीज कब है?
सावन का महीना भगवान महादेव को समर्पित होता है तथा महादेव प्रकृति को संतुलित करने के देवता माने जाते हैं इसलिए तो भगवान महादेव के आगमन के साथ ही पूरे भारत में वर्षा ऋतु का आगमन होता है जिस वजह से प्रकृति हरी-भरी हो जाती है।
हिंदू पुराणों में सावन के महीने में पेड़ पौधे लगाना अति उत्तम माना जाता है जिससे महादेव भी प्रसन्न होते हैं तथा प्रकृति में संतुलन बना रहता है।
हरियाली तीज प्रकृति का त्योहार माना जाता है जिसमें प्रकृति के उत्सव को मनाया जाता है। सावन में प्रत्येक वर्ष शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाता है।
हालांकि साल 2025 में सावन में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 2 दिन पड़ रही है। तृतीया तिथि 26 जुलाई 2025 को देर रात 10:41 पर शुरू होगी तथा अगले दिन 27 जुलाई 2025 को 10:41 पर समाप्त होगी।
उदय तिथि के अनुसार 27 जुलाई 2025 को ही व्रत, पूजा विधि और दान जैसी विधियां की जाएगी इसलिए इसी दिन हरियाली तीज मनाई जाएगी।
हरियाली तीज शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:46 से 05:30 मिनट तक रहेगा।
- प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 05:08 से 06:14 मिनट तक रहेगा।
- अमृत काल: दोपहर 01:56 से 03:34 मिनट तक रहेगा।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:55 से 03:48 मिनट तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:16 से 07:38 मिनट तक रहेगा।
- संध्या मुहुर्त: शाम 07:16 से 08:22 मिनट तक रहेगा।
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:23 से से 28 जुलाई को 01:07 मिनट तक रहेगा।
- अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:19 से 01:11 मिनट तक रहेगा।
- रवि योग: 04:23 पी एम से 28 जुलाई 06:14 ए एम तक रहेगा।
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हरियाली तीज 2025 पूजा विधि
Hariyali Teej का त्यौहार मुख्य रूप से भगवान महादेव और माता पार्वती तथा प्रकृति को समर्पित होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं उदय तिथि के अनुसार प्रातः काल में व्रत का संकल्प लेती हैं तथा विधि विधान से भगवान महादेव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं। हरियाली तीज पर पूजा विधि के लिए कुछ सामग्री को इकट्ठा करना होता है जो कि इस प्रकार होती है-:
भगवान शिव और माता पार्वती की फोटो या मूर्ति, गंगाजल, बेलपत्र, सिंदूर, पीला कपड़ा, धतूरा, शमी के पत्ते, कच्चा सूत, केले के पत्ते, आंक का फूल, जटा वाला नारियल, सुपारी, कलश, अक्षत, दूर्वा/घास,घी कपूर, जनेऊ, चंदन, पूजा की चौकी, पांच प्रकार के फल, मिठाई और गाय का दूध तथा पुरोहित के दक्षिणा।
पूजा विधि
- विवाहित स्त्रियां सुबह स्नान करने के बाद प्रातः काल में व्रत का संकल्प लें।
- एक लकड़ी की बनी चौकी ले और उसे साफ पानी से धोएं।
- चौकी को अच्छे कपड़े से पूछ कर सुखाए और इस पर पीले रंग का वस्त्र बिछाए।
- चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान शिव को पीले फूल अर्पित करें।
- माता पार्वती को लाल चुन्नी और श्रृंगार अर्पित करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा, पांच प्रकार के फल, चंदन आदि संबंधित सामग्री को अर्पित करें।
- देवी देवता की मूर्ति के समक्ष कलश में गंगाजल भरकर उसके ऊपर जटा वाला नारियल रखें। नारियल पर लाल रंग का कच्चा सूत बांधे।
- अब का दीपक अगरबत्ती और धूप जलाएं।
- अब एक पीतल या तांबे की कटोरी में मिठाई का भोग लगाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए शिव चालीसा और पार्वती स्त्रोत का पाठ करें।
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
क्यों खास है हरियाली तीज का त्यौहार?
हरियाली तीज का त्यौहार हिंदू धर्म में सबसे खास माना जाता है क्योंकि यह धार्मिक एवं प्राकृतिक तौर पर अति महत्वपूर्ण है। हिंदू धर्म की विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र एवं विवाहित जीवन को सुख में रखने के लिए हरियाली तीज का व्रत रखती है।
हरियाली तीज का त्योहार से जुड़ी कथा भी प्रचलित है। हरियाली तीज की कथा के अनुसार माता पार्वती ने सावन के महीने में भगवान शिव को अपने पति के रूप में पानी के लिए कठोर तपस्या और व्रत किया था।
जिसके तहत भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से हरियाली तीज का त्योहार विवाहित स्त्रियों में बहुचर्चित त्योहार माना जाता है।
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