Sawan Somwar Vrat क्यों होते हैं खास? यहां जानिए व्रत की विधि, महत्व, व्रत नियम और संबंधित कहानियाँ

सावन का महीना हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण और पवित्र महीना है, जो भगवान शिव की पूजा और व्रत के लिए जाना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष लाभ होता है, और व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

अगर आप जाना चाहते हैं कि सावन 2025 की शुरुआत कब से है और इस व्रत का क्या महत्व है तो आदि संबंधित जानकारी के लिए आप हमारा यह लेख अवश्य पढ़ें।

सावन सोमवार के व्रत का महत्व

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष लाभ होता है, और व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

सावन के व्रत से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है, और वह अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। भारत के राज्य उत्तराखंड के शहर हरिद्वार में सावन मेले का सबसे बड़ा उत्सव देखा जाता है। ‌

यहां कावड़िया दूर-दूर से आते हैं तथा गंगाजल भरकर अपने निकटतम स्थानों के शिव मंदिर पर जाकर शिवरात्रि को भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।‌

इस दौरान भारत में बाबा केदारनाथ, बाबा बैद्यनाथ, और बाबा अमरनाथ यात्रा सबसे लोकप्रिय यात्रा मानी जाती है जिसमें लाखों भक्तों की भगवान शिव के लिए आस्था देखी जा सकती है क्योंकि इन यात्राओं के कठिन मार्ग से होकर भक्त भगवान शिव की एक झलक के लिए कई किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। ‌

सावन सोमवार व्रत की तिथियां 2025

इस वर्ष सावन सोमवार व्रत की तिथियां इस प्रकार हैं –

  • पहला सावन सोमवार व्रत – 14 जुलाई 2025, सोमवार
  • दूसरा सावन सोमवार व्रत – 21 जुलाई 2025, सोमवार
  • तीसरा सावन सोमवार व्रत – 28 जुलाई 2025, सोमवार
  • -चौथा सावन सोमवार व्रत –  4 अगस्त 2025, सोमवार

सावन के व्रत की विधि

व्रत का प्रारंभ – सावन के महीने के प्रारंभ में व्रत का संकल्प लिया जाता है, और फिर पूरे महीने भगवान शिव की पूजा की जाती है। कुछ लोग 16 सोमवार का व्रत भी सावन के पहले सोमवार व्रत से ही शुरुआत करते हैं जो की सबसे ज्यादा फलदाई होता है। ‌

भगवान शिव की पूजा – भगवान शिव की पूजा करने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, और बेल पत्र चढ़ाया जाता है, और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। यह पूजा आप अपने घर के नजदीकी शिव मंदिर में जाकर कर सकते हैं। ‌

सावन सोमवार व्रत के नियम

सावन सोमवार व्रत के नियम इस प्रकार हैं-:

शाकाहारी भोजन  सावन के व्रत में व्यक्ति को शाकाहारी भोजन करना होता है, और मांसाहारी भोजन से परहेज करना होता है।

ब्रह्मचर्य – सावन के व्रत में व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है, और अपने मन और शरीर को शुद्ध और पवित्र रखना होता है।

सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि

सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है-

भगवान शिव की पूजा – भगवान शिव की पूजा करने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, और बेल पत्र चढ़ाया जाता है, और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है।

पंचामृत अभिषेक – पंचामृत अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, और व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जापसावन में भगवान शिव की भक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जैसी शिव पूजा महत्वपूर्ण तौर पर की जाती है।

प्रत्येक सोमवार शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक, भस्म आरती और महामृत्युंजय जाप जैसी विधियां महाकाल की शक्ति का रूप प्रदर्शित करती है।

कई भक्त जन शिव मंदिर में सावन में आने वाले सोमवार के दिन रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय जैसे जब परिवार की खुशहाली एवं जीवन में सुख शांति के लिए करते हैं। ‌‌

हालांकि यह सर्वप्रथम ज्ञात है कि भगवान शिव भक्तों द्वारा सच्चे मन से की गई पूजा का विशेष लाभ देते हैं। ‌ भगवान भोलेनाथ है इसीलिए उन्हें केवल एक बेलपत्र तथा जल से भी खुश किया जा सकता है लेकिन वह पूजा सच्चे मन एवं पवित्र रूप से होनी चाहिए। ‌

भगवान शिव से जुड़ी सावन संबंधित महत्वपूर्ण कहानियाँ

समुद्र मंथन – देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। यह घटना श्रावण मास के सोमवार को हुई थी, जो भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है।

भगवान शिव और सती का विवाह – भगवान शिव और सती का विवाह भी श्रावण मास में हुआ था, जो उनके अनंत प्रेम की प्रतीकता है। इसलिए, श्रावण सोमवार को शिव-पार्वती के विवाह के दिन के रूप में मनाया जाता है।

राजा दक्ष की यज्ञ – राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। इससे सती ने अपने पिता के यज्ञ में जाने के बावजूद भगवान शिव का अपमान सहन नहीं कर पाई और अपने प्राणों की आहुति दे दी।

मार्कंडेय की कहानी मार्कंडेय एक युवा लड़का था, जिसकी मृत्यु श्राप के कारण निश्चित थी। उसने श्रावण सोमवार का व्रत रखा और भगवान शिव की पूजा की, जिससे उसकी मृत्यु टल गई। भगवान शिव ने उसे वरदान दिया कि वह दीर्घायु होगा।

द्रौपदी की कहानी पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने वनवास के दौरान भोजन की कमी के समय भगवान कृष्ण की सलाह पर श्रावण सोमवार का व्रत रखा और भगवान शिव की पूजा की। इससे उन्हें अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई, जिससे उनकी भोजन की समस्या हल हो गई।

राजा हिमवान और देवी पार्वती की कहानी राजा हिमवान ने भगवान शिव से वरदान मांगने के लिए श्रावण सोमवार का व्रत किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें एक पुत्री का आशीर्वाद दिया, जो आगे चलकर देवी पार्वती कहलाईं।

कांवड़ यात्रा कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण यात्रा है। इसमें भक्त गंगा जल लेकर भगवान शिव के मंदिरों में जाकर उनकी पूजा करते हैं।

इन कहानियों से हमें भगवान शिव की महिमा और उनके भक्तों की श्रद्धा का पता चलता है। सावन का महीना भगवान शिव की पूजा और आराधना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

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निष्कर्ष

निष्कर्ष यह है कि सावन के व्रत का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है, और इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष लाभ होता है।

सावन के व्रत से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है, और वह अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। सावन सोमवार व्रत की विधि और नियमों का पालन करके, व्यक्ति भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकता है, और अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि ला सकता है। 

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